वाराणसी: चिराईगांव विकास खण्ड के 21 ग्राम पंचायतों में पिछले एक महीने से अनुपस्थित रहने वाले 21 ग्राम पंचायत सहायकों की सूची मंगलवार की शाम वायरल होने के बाद सम्बंधित ग्राम पंचायत में तैनात पंचायत सहायकों में हड़कंप की स्थिति बनी रही। आपको बता दें कि इस प्रकरण से सम्बंधित खबर को जब राष्ट्रीय सहारा ने बुधवार को "..........तो एक माह से ग्राम सचिवालय पर नहीं पहुंचे 21 पंचायत सहायक" नामक शीर्षक से प्रमुखता से प्रकाशित किया। खबर प्रकाशित होने के बाद बुधवार को पूरे दिन चिरईगांक मुख्यालय पर हड़कम्प की स्थिति बनी रही। अंततः बुधवार को ही खण्ड विकास अधिकारी ने राष्ट्रीय सहारा में प्रकाशित खबर को संज्ञान में लेते हुए अनुपस्थित 21 पंचायत सहायकों को कारण बताओ नोटिस जारी करने का आदेश एडीओ पंचायत को दे दिया। साथ ही उन्होंने एडीओ पंचायत से ब्लाक की सभी ग्राम पंचायतों में तैनात पंचायत सहायकों की कड़ी मानिटरिंग करते रहने को कहा।
पंचायत सहायकों की होगी कड़ी मानीटरिंग-
एडीओ पंचायत कमलेश सिंह ने मीडिया को बताया कि खण्ड विकास अधिकारी ने सभी अनुपस्थित पंचायत सहायकों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है साथ ही विकास खण्ड में तैनात सभी ग्राम पंचायत सहायकों की विधिवत मानीटरिंग करते रहने को भी कहा है। बीडीओ के आदेश पर अनुपस्थित सभी पंचायत सहायकों को नोटिस जारी करके स्पष्टीकरण मांगा जायेगा और साथ ही अनुपस्थित पंचायत सहायकों की रोजाना डायरी को भी तलब किया जायेगा। एडीओ पंचायत ने पंचायत सहायकों की अनुपस्थिति से सम्बंधित वायरल सूची को सही मानते हुए संभावना जताते हुए कहा कि ऐसा लगता है मंगलवार को चांदपुर में पंचायत सहायक को हटाये जाने के सम्बंध में आयोजित ग्राम पंचायत की बैठक के दौरान हुए हंगामे के बाद ही किसी पंचायत सहायक ने ही पंचायत सहायकों की एक माह से अनुपस्थित रहने से सम्बंधित सूची वायरल की होगी। बीडीओ के सख्त रूख अपनाने से अनुपस्थित 21 पंचायत सहायकों में हड़कम्प की स्थिति बनी हुई है।
लेकिन ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या ऐसे ही मीडिया कर्मियों को छोटी-छोटी कमियों को अधिकारियों के नजर में कब तक लाना होगा क्या अधिकारी इन बातों को नहीं जानते या नहीं समझते क्या जब तक अखबार या पोर्टलों में खबर नहीं चलेगी तब तक अधिकारी कर्मचारियों के ऊपर शख्ती नहीं करेंगे। अब समस्या यह है पत्रकार जन समस्याओं के बारे में शासन का अवगत करवाएं या फिर इन कर्मचारियों के ऊपर नजर रखे। अगर ऐसा ही है तो हर सरकारी कार्यालय में एक ऐसे ही पत्रकार की जरूरत है जोकि उस विभाग के कर्मचारियों के बारे में ही दिन रात लिखता और देखता रहे और अधिकारियों को बताता रहें।
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