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Monday, October 26, 2026

लगातार बढ़ती आर्थिक विषमता गरिबी मुक्त देश बनाने में रोड़े

प्रोफेसर राहुल सिंह, अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश वाणिज्य परिषद की कलम से

गरीबी बहुत बुरी बीमारी है, यह अपने साथ सैकड़ों समस्याओं को लेकर आती है और जीवनमान और विकास को चरमरा देती हैं। लगातार बढ़ती आर्थिक विषमता गरिबी मुक्त देश बनाने में रोड़े खड़े करती है, ऊपर से महंगाई, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी गरीबी कम होने नहीं देती। हर क्षेत्र में राजनीतिक हस्तक्षेप और भाई-भतीजावाद दबाव बने रहता हैं। मिलावटखोरी, प्रदूषण, कांक्रीट के बढ़ते जंगल और कटते वन ग्लोबल वार्मिंग बढ़ाते है, इससे प्राकृतिक आपदाएं आती है, बीमारियां बढ़ती है, सेहत पर बुरा असर पड़ता है, जिसकी सबसे बड़ी मार गरीब तबके को झेलनी पड़ती हैं। गरीब तबके को विविध सरकारी योजनाओं के बावजूद योग्य जीवनमान स्तर तक पहुंचने में बेहद मुश्किलें आती हैं।


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विश्व असमानता रिपोर्ट 2026 अनुसार, देश में शीर्ष 10 फीसदी आबादी के पास राष्ट्रीय आय का 58 प्रतिशत और 65 प्रतिशत राष्ट्रीय संपत्ति है, जबकि निचले तबके के 50 फीसदी जनसंख्या के पास केवल 15 प्रतिशत राष्ट्रीय आय का हिस्सा हैं। शीर्ष 1 फीसदी के पास कुल राष्ट्रीय संपत्ति का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा हैं। विश्व आर्थिक मंच अनुसार, वैश्विक लैंगिक अंतर सूचकांक 2026 में भारत 145 देशों में से 131वें स्थान पर हैं। हर साल 17 अक्टूबर को “अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस” गरीबी मिटाने के लिए जनजागृति हेतु पुरे विश्व में मनाया जाता हैं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा इस साल 2026 को “सभी के लिए सुरक्षित घर” यह थीम हैं।

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गरीबी में दो वक्त की रोजीरोटी के इंतजाम में लोगों का अधिकतम समय निकल जाता है, घर परिवार, बच्चों के लिए पर्याप्त समय भी नहीं निकाल पाते। उनमें सेहत, शिक्षा, भविष्य और लोककल्याणकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता की कमी होती हैं। अधिकतर राजनीतिक दल भी चुनाव के वक्त गरीबों को याद करते है और उनसे किये गए बड़े-बड़े वादे समयनुसार भूल जाते हैं। गरीबी में जन्मा बच्चा अपनेआप को गरीबी की दलदल से निकालने के लिए असंख्य संघर्षों को सहता है, ताकि अपने साथ आनेवाली पीढ़ी को भी बेहतर जीवनस्तर मिल सकें, परंतु चंद लोगों के हिस्से ही यह कामयाबी आती हैं।

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गरीबी के कारण पेट भर अनाज नहीं मिलता उसमें भी पोषक आहार नहीं, साफ़ पीने का पानी नहीं, रहने की सही व पर्याप्त जगह नहीं होती, मौसम के बदलाव के हिसाब से भी जीवन जीना बेहद कष्टदायक होता हैं। अधिक समय तक पेटभर खाना और पोषक आहार, शुद्ध जल, शुद्ध ऑक्सीज़न शरीर को न मिलने के कारण कुपोषण और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की संभावना बनी रहती हैं। बीमार होने पर बेहतर इलाज, दवाइयों और हेल्थ इंश्योरेंस तक पहुँच न होने से रोग का समय पर इलाज नहीं हो पाता, रोग गंभीर होता जाता है और जीवन प्रत्याशा कम होती जाती हैं। घर की माली हालत के कारण बहुत बार बच्चों को जल्द स्कूल छोड़ना पड़ता है और परिवार को आर्थिक मदद के लिए काम करना पड़ता हैं।

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हमारे देश में बेरोजगारी की स्थिति से हम अच्छे से वाकिफ है, थोडेसे चतुर्थ श्रेणी पद के लिए भी लाखों उच्च शिक्षित उम्मीदवारों के आवेदन मिलते है, जिसमें अभियंता, प्रबंधन, पीएचडी पदवी धारक तक बड़ी संख्या में होते हैं। आवेदन के लिए इन लाखों बेरोजगार युवा उम्मीदवारों से परीक्षा शुल्क के तौर पर करोड़ों रुपया सरकार के पास जमा होता हैं। उम्र निकल जाती है, लेकिन योग्यतानुसार रोजगार नहीं मिलता, योग्यतानुरूप रोजगार या नौकरी मिलना तो बहुत मुश्किल हैं। मनुष्य की शिक्षा और रोजगार ही उसे गरीबी से उबरने का मौका देती है, अगर कोई कड़ी मेहनत करके उच्च शिक्षा हासिल करता है और नौकरी या रोजगार के योग्यता रखते हुए भी वह रोजगार प्राप्ति से वंचित होता है तो उसके और उसके परिवार के सपने चकनाचूर हो जाते हैं। नौकरी के लिए भ्रष्टाचार, पेपर लीक और राजनीतिक दबाव की खबरें भी अक्सर सुर्खियों में होती है, फिर ऐसे परिस्थिति में गरीबी की जंजीरों को कैसे तोड़कर व्यक्ति बाहर निकलेगा?

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बढ़ती बेरोजगारी के कारण उच्च शिक्षित युवा भी जो काम मिले, वह करने को तैयार हो जाते है, कम शिक्षा वाले युवा के साथ कम आय वाला शारीरिक श्रम भी करते हैं। कौशल की कमी और संसाधनों के कारण भी बेरोजगारी बढती हैं। गरीबी में असुरक्षित आवास, भीड़-भाड़ वाली तंग गली, गंदी नालियां, झोपड़पट्टी, कचरा, अस्वच्छता और मच्छर-मक्खियों का प्रकोप, अनधिकृत बस्तियों में रहने या बेघर होने से पर्यावरण से जुड़े खतरों को भी सहना पड़ता हैं। ऐसे निकृष्ट दूषित वातावरण में बीमारी, नशाखोरी और अपराध गतिविधियों का बोलबाला होता हैं।

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ऐसे परिस्थिति में रहने के कारण मनुष्य की सोच-समझ पर गहरा आघात होता है, हमेशा पैसों की तंगी के बारे में विचार करना, अपनी इच्छा, आकांक्षाओं को मारकर अधिकतर कर्ज के बोझ तले घुट कर जीते हैं, सामाजिक बदनामी, पारिवारिक कलह, तनाव, बैचेनी शरीर के साथ मानसिक स्वास्थ्य भी खराब करती हैं। गरीबों को अधिकतर सामाजिक, जातिवादी भेदभाव का शिकार होना पड़ता हैं। उनके हिस्से राजनीतिक प्रतिनिधित्व की भूमिका नहीं के बराबर होती हैं। जागरूकता की कमी और सामाजिक सुरक्षितता की कमी के कारण वे अपराध या शोषण का शिकार होने के खतरे में जीने को मजबूर होते हैं।

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जिस देश में उन्नत स्वास्थ्य सुविधा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रणाली और योग्यतानुरूप काम मिलता है, जिसके लिए कोई अलग से शुल्क वसूला नहीं जाता, बिना किसी भेदभाव के सबको समान मौके मिलते है, वह देश तरक्की की राह पर होता हैं। अगर यह स्थिति हमारे भारत देश में हो तो गरीबी को जड़ से खत्म किया जा सकता है, क्योंकि गरीबी से निपटने के लिए सबसे ज्यादा खर्चा स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार पर ही होता हैं। अगर यह तीनों सेवाएं उन्नत स्तर पर प्रत्येक को मुफ्त में मिलने लगे तो, हर व्यक्ति सक्षम, काबिल, जिम्मेदार और जीवनमान को बेहतर बनाने में कुशल होगा। फिर जनता को मुफ्त अनाज, बिजली, पानी देने की जरुरत नहीं होगी, क्योंकि गरीबी के दलदल से उबरकर व्यक्ति इस काबिल होगा कि, सब खर्चे वह खुद वहन कर सकेगा।

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शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की उपलब्धता में अनेक पीढ़ियों की जिंदगियां खत्म हो जाती है, फिर भी उन तक यह सहज पहुंच नहीं बना पाती। देश में गरीबों को सामाजिक समरसता में प्रस्थापित करने हेतु उन्हें काबिल बनाना बहुत जरुरी है, ताकि वे खुद अपना विकास कर सकें। सरकार ने भ्रष्टाचार पर नकेल कसकर स्वास्थ्य सुविधा, शिक्षा और रोजगार पर सर्वाधिक बजट रखना चाहिए। हर हाथ को कुशलता और योग्यतानुरूप काम मिलना चाहिए। बीमारी के इलाज में पैसों की कमी के कारण किसी भी गरीब की जान नहीं जानी चाहिए। सबको पोषक आहार, स्वच्छ जल और शुद्ध ऑक्सीजन मिलना चाहिए। देश में सक्षम नागरिक बनाने पर जोर देना चाहिए।

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विंग्स ओवर गंगा’ के अंतिम दिन स्वास्थ्य विभाग ने 370 लोगों को दी चिकित्सा सुविधा

वाराणसी: वायु सेना के ‘विंग्स ओवर गंगा’ एरियल शो के अंतिम दिन रविवार को बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे।जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार के निर्देशन में दर्शकों की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए स्वास्थ्य विभाग ने गंगा घाटों, आयोजन स्थल के आसपास और प्रमुख मार्गों पर व्यापक चिकित्सा व्यवस्था की। घाटों पर विशेष चिकित्सा शिविर लगाए गए, जबकि भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में मोबाइल मेडिकल टीमें सक्रिय रहीं। आपात स्थिति से निपटने के लिए विभिन्न स्थानों पर एंबुलेंस भी तैनात की गईं।


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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन. पी. सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य टीमों ने पूरे दिन 370 लोगों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई। इनमें सिरदर्द, बुखार, बदन दर्द, पेट दर्द, चक्कर, उल्टी, निर्जलीकरण और अन्य सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित लोग शामिल थे। शिविरों में प्राथमिक जांच के बाद जरूरत के अनुसार तत्काल उपचार, आवश्यक दवाएं और चिकित्सकीय परामर्श दिया गया। गर्मी, भीड़ और लंबे समय तक खड़े रहने के कारण अस्वस्थ हुए लोगों को उपचार के साथ जरूरी सावधानियों की जानकारी भी दी गई।

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गंभीर स्थिति वाले मरीजों को उच्च चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए 108 एंबुलेंस सेवा को अलर्ट मोड पर रखा गया था। जिले के निजी अस्पतालों और ब्लड बैंकों को भी सतर्क किया गया था। एंबुलेंस के माध्यम से दो मरीजों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, चौकाघाट और एक मरीज को श्री शिव प्रसाद गुप्त मंडलीय चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। अस्पतालों में उन्हें समय पर उपचार मिला और चिकित्सकों ने उनकी स्थिति पर निगरानी रखी।

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सीएमओ ने बताया कि चिकित्सा व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में वाराणसी के स्वास्थ्य संस्थानों के अलावा अन्य मेडिकल कॉलेजों, निजी अस्पतालों और दूसरे जिलों से आई चिकित्सकीय टीमों ने भी सहयोग किया। सभी टीमों ने आपसी समन्वय से काम करते हुए दर्शकों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराई। इन सभी गतिविधियों की निगरानी त्रिनेत्र भवन स्थित काशी कमांड सेंटर से की जा रही थी।

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उन्होंने कहा कि बड़े सार्वजनिक आयोजनों में भारी भीड़ के कारण अचानक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे आयोजनों में आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है। सीएमओ ने सेवाएं देने वाले चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ, एंबुलेंस कर्मियों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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एयर शो में स्वास्थ्य विभाग मुस्तैद, 142 लोगों का उपचार

वाराणसी: वायु सेना द्वारा शनिवार को आयोजित हवाई प्रदर्शन के दौरान दर्शकों को त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा जनपद के विभिन्न गंगा घाटों पर व्यापक व्यवस्थाएं की गईं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन. पी. सिंह के निर्देशन में नमो घाट सहित विभिन्न घाटों पर चिकित्सकीय टीमें तैनात की गईं। आकस्मिक स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई।



मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन. पी. सिंह ने बताया कि हवाई प्रदर्शन के दौरान विभिन्न घाटों पर स्थापित चिकित्सा शिविरों में कुल 142 लोगों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। इनमें निर्जलीकरण (शरीर में पानी की कमी), माइग्रेन (आधे सिर में दर्द), गर्मी के कारण थकावट, तीव्र गैस्ट्राइटिस (पेट में जलन एवं सूजन), उल्टी, चक्कर आने तथा सर्दी-जुकाम से पीड़ित लोग शामिल थे। चिकित्सकीय टीमों ने मरीजों की स्थिति के अनुसार जांच, प्राथमिक उपचार एवं आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराईं।

            
नमो घाट पर बीमार हुए बच्चे को प्राथमिक उपचार देने के उपरांत जिला प्रशासन के सहयोग एवं संबंधित विभागों के समन्वय से ग्रीन कॉरिडोर बनाकर एंबुलेंस के माध्यम से शीघ्र चिकित्सालय पहुंचाया गया, जहां उसे भर्ती कर उपचार उपलब्ध कराया गया। हवाई प्रदर्शन के दौरान किसी भी आकस्मिक स्वास्थ्य समस्या से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा चिकित्सकीय टीमों के साथ एंबुलेंस सेवा भी सक्रिय रखी गई। आवश्यकता पड़ने पर मरीजों को संबंधित चिकित्सालयों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई, ताकि उन्हें समय पर उपचार मिल सके।

         
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि बड़े सार्वजनिक आयोजनों में लोगों की स्वास्थ्य सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से चिकित्सकीय टीमों को आवश्यक संसाधनों के साथ तैनात किया गया, जिससे दर्शकों को मौके पर ही चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके। सीएमओ ने आमजन से अपील की कि ऐसे आयोजनों के दौरान पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें, धूप एवं गर्मी से बचाव करें तथा अस्वस्थ महसूस होने पर तत्काल निकटतम चिकित्सा शिविर में संपर्क करें। गंभीर लक्षण होने पर चिकित्सा सहायता लेने में विलंब न करें।

Thursday, October 15, 2026

आमिर खान के भांजे इमरान खान को 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का नोटिस, CEC के इस्तीफे की मांग वाले प्रदर्शन में लिया था हिस्सा

मुंबई: बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान के भांजे और अभिनेता इमरान खान को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। खबरों के मुताबिक, मुंबई पुलिस ने उन्हें 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के मामले में की गई है।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, इमरान खान ने मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में आयोजित विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। प्रदर्शन के दौरान मुंबई पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था। अब उनके खिलाफ इमिग्रेशन कानून के तहत कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई है। खबरों में दावा किया गया है कि इमरान खान के पास अमेरिकी पासपोर्ट है। उन पर आरोप है कि विदेशी नागरिक होने के बावजूद उन्होंने राजनीतिक प्रदर्शन में हिस्सा लिया। रिपोर्टों के अनुसार, उनके मामले में इमिग्रेशन एक्ट की धारा 29 और 7 का उल्लेख किया गया है। हालांकि, नोटिस की सटीक कानूनी स्थिति और संबंधित धाराओं के इस्तेमाल की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।

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हिरासत के बाद इमरान खान ने उठाए सवाल

हिरासत में लिए जाने के बाद इमरान खान ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा की थी, जिसमें वह पुलिस वैन के अंदर बैठे दिखाई दे रहे थे। तस्वीर के साथ उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में लिखा था, ‘लगता है मैं ड्राइव पर जा रहा हूं।’ मीडिया से बातचीत में अभिनेता ने कहा कि वह मुंबई के निवासी के तौर पर प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे थे। उन्होंने लोगों की आवाजाही की स्वतंत्रता और अपनी बात रखने के अधिकार को लेकर सवाल उठाए। इमरान खान ने कहा कि वह यह जानना चाहते हैं कि लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध क्यों लगाया जा रहा है और उनकी आवाज क्यों दबाई जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी विशेष मांग के साथ नहीं, बल्कि शहर के नागरिक के तौर पर वहां मौजूद थे।

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अब आगे क्या होगा?

इमरान खान को कथित तौर पर 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का नोटिस दिए जाने की खबर के बाद मामले पर चर्चा तेज हो गई है। अब इस प्रकरण में मुंबई पुलिस और संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। नोटिस की शर्तों, लागू कानूनी प्रावधानों और आगे की कार्रवाई की स्थिति आधिकारिक दस्तावेजों से स्पष्ट होगी।

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Wednesday, October 14, 2026

नवरात्र में मांस बेचने पर नगर निगम सख्त, सप्तसागर में खुली दुकान पर ठोका 5,000 का जुर्माना

वाराणसी: नवरात्र पर नगर निगम के सख्त आदेश के बाद भी शहर में चोरी-छिपे मांस बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई है। इस क्रम मंगलवार को चेकिंग अभियान के दौरान सप्तसागर क्षेत्र में एक मांस की दुकान खुली मिलने पर निगम की टीम ने तत्काल पांच हजाररुपये का चालान काटा। इसके साथ ही चेतावनी दी गई कि नवरात्र में नियम तोड़ने वालों पर आगे भी इसी तरह की कठोर दंडात्मक कार्रवाई जारी रहेगी। श्रद्धालुओं की आस्था और भावनाओं को ध्यान में रखते हुए नगर निगम कार्यकारिणी ने तक शहर की सभी मांस, मछली व मुर्गा की दुकानों को बंद रखने का निर्देश जारी किया था। 


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यह आदेश 26 अक्टूबर तक प्रभावी रहेगा। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल के निर्देश पर सभी जोनों में विशेष टीमें गठित कर सघन चेकिंग अभियान भी चलाया गया। पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. विजय अमृतराज ने बताया कि मंगलवार को पूरे शहर में व्यापक निरीक्षण किया गया। इस दौरान अधिकतर इलाकों में दुकानें बंद पाई गईं, लेकिन सप्तसागर में एक दुकान चोरी-छिपे संचालित पाई गई, जिस पर मौके पर ही पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। 

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उन्होंने स्पष्ट किया है कि यह अभियान पूरे नवरात्र लगातार चलाया जाएगा और किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने वाले दुकानदारों व शिथिलता दिखाने वाले कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई होगी। इसके अलावा शासकीय नियमों और सदन के प्रस्ताव के तहत किसी भी मंदिर से 500 मीटर और श्री काशी विश्वनाथ धाम के दो किलोमीटर के दायरे में मांस की बिक्री, उपयोग व पशुवध पर पूरी तरह पाबंदी प्रभावी रहेगी।  

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वहीं काशी में आयोजित होने वाले ऐतिहासिक एरियल डिस्प्ले-2026 को देखते हुए नगर निगम ने नमो घाट के 20 से 30 किलोमीटर के दायरे में 19 से 26 अक्टूबर तक मांस-मछली की बिक्री व कटिंग पर भी पूरी तरह रोक लगा दी है ताकि फाइटर जेट्स की निर्बाध उड़ान और 'बर्ड-हिट' जैसी गंभीर दुर्घटनाओं को रोका जा सके । नगर आयुक्त ने बताया कि एयर शो के दौरान आकाश में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गंगा घाटों और आसपास के समूचे क्षेत्रों में पतंगबाजी पर भी पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।

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सभी प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध और प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित करने का नगर आयुक्त ने दिया निर्देश

वाराणसी: नगर निगम में मंगलवार को आयोजित संभव जनसुनवाई के दौरान कुल 22 शिकायतें प्राप्त हुईं। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने जनसुनवाई के दौरान लोगों की समस्याएं ध्यान से सुनीं। समस्याओं के त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश देते हुए प्रत्यावेदन अग्रसारित किए। 


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जनसुनवाई के दौरान शहर के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे नागरिकों ने जर्जर भवन, सड़कों की स्थिति, साफ-सफाई, सीवर समस्या, स्ट्रीट लाइट, असेसमेंट, दाखिल-खारिज और आवास जैसी विभिन्न नागरिक समस्याओं से संबंधित अपनी शिकायतें दर्ज कराईं। 

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इसमें बजरडीहा के धनंजय चौबे ने सड़क के लिए प्रत्यावेदन दिया। वहीं औरंगाबाद के लवकुश चौरसिया ने जर्जर भवन, तरना शिवपुर के प्रियंका मिश्रा ने साफ-सफाई, सारनाथ के रवि कुमार पटेल ने असेसमेंट, आदमपुर के तारिक अनवर व इंद्रपुरी कॉलोनी के ओमप्रकाश चौबे ने सीवर के संबंध में शिकायत दर्ज कराई। बजरडीहा के मो. सुलैनी और शिवपुरवा के अवधेश कुमार श्रीवास्तव ने स्ट्रीट लाइट, शिवपुरवां के राहुल सोनकर और चांदपुर के अमरजीत ने साफ-सफाई के संबंध में प्रत्यावेदन दिया। 

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नगवां के पीयूष कुमार पांडेय, नदेसर के रोहन मिश्रा व मिसिर पोखरा के उपहास कुमार ने दाखिल-खारिज के संबंध में आवेदन किया। कोल्हुआ विनायका के धर्मेंद्र कुमार सोनकर ने संचिका के संबंध में काजीपुरा खुर्द के सज्जाद खान ने सर्विस बीमा व भुगतान, सीरगोवर्धन के शिवधनी ने स्ट्रीट लाइट तथा कमच्छा के रामानन्द ने सीवर के संबंध में अपनी शिकायतें रखीं। 

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इसके अलावा लक्ष्मनपुर की दुर्गा देवी और रूबी प्रजापति ने आवास, मढवां लमही के वैभव शर्मा ने सड़क, कोतवाली के आनंद कुमार सुरेका ने जर्जर भवन तथा पियरीया पोखरी के अंगद चौहान ने सीवर के संबंध में शिकायत दर्ज कराई। निगम अधिकारियों द्वारा सभी प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध और प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। 

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काशी में संस्कृति संसद 2026, संस्कृति, राष्ट्र और नई पीढ़ी के सवालों पर होगा व्यापक मंथन

वाराणसी: भारतीय संस्कृति, ज्ञान परम्परा, सांस्कृतिक-सामाजिक मूल्य और नई पीढ़ी के साथ उसके सम्बन्धों पर राष्ट्रीय विमर्श के लिए काशी में 3 से 5 नवम्बर तक संस्कृति संसद 2026 का आयोजन किया जाएगा। रुद्राक्ष अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग एवं कन्वेंशन सेन्टर में होने वाली छठी संस्कृति संसद में सन्तों, विद्वानों, संगठकों, वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों, युवाओं और कलाकारों की भागीदारी रहेगी। कार्यक्रम का आयोजन गंगा महासभा द्वारा अखिल भारतीय सन्त समिति, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और श्री काशी विद्वत परिषद के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।


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आयोजन में देशभर से लगभग तीन हजार सन्तों के जुटने की जानकारी दी गई है। संस्कृति संसद की रूपरेखा केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें युवा संवाद, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, चित्रकला, फोटोग्राफी और विभिन्न प्रतियोगिताओं को भी शामिल किया गया है। इसके माध्यम से संस्कृति के आध्यात्मिक, बौद्धिक, सामाजिक और कलात्मक आयामों को एक साझा मञ्च पर प्रस्तुत किया जाएगा।

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संस्कृति संसद 2026 में मुख्य संस्कृति संसद, Gen Z कॉन्क्लेव, संस्कृति उत्सव, चित्रकला प्रदर्शनी, राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय फोटोग्राफी प्रदर्शनी, रंगोली प्रतियोगिता तथा बच्चों की चित्रकला सहित अन्य सांस्कृतिक गतिविधियाँ आयोजित की जाएँगी। मुख्य सभागार में सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक होने वाली संस्कृति संसद में सन्त, विद्वान, वैज्ञानिक और विशेषज्ञ विभिन्न विषयों पर विचार रखेंगे। समानान्तर रूप से आयोजित Gen Z कॉन्क्लेव में युवा भाषण, तथ्यों एवं आँकड़ों पर आधारित प्रस्तुतियों, पैनल चर्चा और प्रश्नोत्तर के माध्यम से अपनी बात रखेंगे। इस कॉन्क्लेव की प्रस्तावित संरचना में लगभग 90 प्रतिशत युवा वक्ताओं और 10 प्रतिशत विशेषज्ञों की भागीदारी रखी गई है।

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शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक आयोजित संस्कृति उत्सव में राष्ट्र॰धर्म॰संस्कृति॰संस्कार पर आधारित युवा कलाकारों और सांस्कृतिक समूहों की प्रस्तुतियाँ होंगी। ‘राम, कृष्ण और शिव की पावन भूमि उत्तर प्रदेशः धरोहर, संरक्षण, संवर्धन’ विषय पर अन्तर्राष्ट्रीय चित्रकला एवं फोटोग्राफी प्रदर्शनियों शिंजो आबे कला दीर्घा में आयोजित की जाएँगी। इसके साथ-साथ रंगोली और बाल चित्रकला प्रतियोगिताओं के जरिए विभिन्न आयु वर्गों की सांस्कृतिक भागीदारी को स्थान दिया जाएगा।

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आयोजन की संरचना में सन्त समाज और पारम्परिक विद्वत संस्थाओं के मार्गदर्शन के साथ युवाओं को स्वतन्त्र रूप से विचार रखने का अवसर देना महत्वपूर्ण पक्ष है। एक ओर सन्तों और विद्वानों की भागीदारी भारतीय परम्पराओं तथा ज्ञान-विमर्श को मञ्च प्रदान करेगी, वहीं Gen Z कॉन्क्लेव में युवा समकालीन प्रश्नों पर अपने विचार रख सकेंगे। भारतीय संस्कृति को लेकर राष्ट्रीय विमर्श में परम्परा, आधुनिकता और सामाजिक बदलाव के बीच सम्बन्ध महत्वपूर्ण विषय रहे हैं। संस्कृति संसद में विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों की भागीदारी इन विषयों पर विचारों के आदान-प्रदान का अवसर उपलब्ध कराएगी। काशी में आयोजित होने वाला यह तीन दिवसीय कार्यक्रम विचार-विमर्श, युवा सहभागिता और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को एक साथ जोड़ता है। इसकी व्यापकता का आधार यही है कि संस्कृति को केवल अतीत की विरासत के रूप में नहीं, बल्कि समाज, ज्ञान, कला और नई पीढ़ी से जुड़े विषय के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।

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पत्रकारवार्ता में अखिल भारतीय सन्त समिति एवं गंगा महासभा के राष्ट्रीय महामन्त्री स्वामी जीतेन्द्रानन्द सरस्वती, जगद्गुरु बालक देवाचार्य, प्रोफेसर राम नारायण द्विवेदी जी (महामन्त्री- श्रीकाशी विद्वत परिषद्), गोविन्द शर्मा (महामन्त्री संगठन, गंगा महासभा) और कैलाश आचार्य (कार्यकारी अध्यक्ष- आयोजन समिति) आदेश भट्ट (प्रभारी- युवा विमर्श, Gen Z कॉन्क्लेव), नागेन्द्र सिंह (संयोजक- Gen Z  कॉन्क्लेव) उपस्थित रहे।

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