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Saturday, May 16, 2026
वाराणसी में कारोबारी महिला के नाम पर 19 करोड़ की GST चोरी, खुद को CA बताने वाले पर मुकदमा दर्ज
Thursday, May 14, 2026
यूपी में शुरू हो सकती हैं ऑनलाइन क्लासेस और वर्क फ्रॉम होम
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बीते मंगलवार को 5 कालिदास मार्ग स्थित अपने सरकारी आवास पर अधिकारियों के साथ अहम बैठक की।बैठक में प्रदेश में ऑनलाइन क्लासेस और वर्क फ्रॉम होम जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गयी।
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सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री की अपील के बाद राज्य सरकार संभावित परिस्थितियों को देखते हुए नई व्यवस्थाओं पर मंथन कर रही है. बैठक में विशेष रूप से प्रदेश में ऑनलाइन पढ़ाई को प्रभावी ढंग से लागू करने की तैयारियों पर चर्चा हुई।
इसके साथ ही प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक तैयारियों, दिशा-निर्देशों और विभिन्न विभागों के समन्वय को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया।अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश दिए जा सकते हैं।
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Monday, May 11, 2026
पूर्व DGP राम यश सिंह को अंतिम विदाई में उमड़ा सत्ता-प्रशासन का सैलाब, STF चीफ अमिताभ यश के पिता के त्रयोदश संस्कार में भावुक हुआ लखनऊ
लखनऊ: उत्तर प्रदेश STF प्रमुख और एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश के पिता, पूर्व आईपीएस अधिकारी एवं बिहार के पूर्व डीजीपी राम यश सिंह के त्रयोदश संस्कार में रविवार को राजधानी लखनऊ भावनाओं से भर उठा। विभूतिखंड स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित त्रयोदश ब्रह्मभोज में शासन, प्रशासन, राजनीति, न्यायपालिका और मीडिया जगत की तमाम बड़ी हस्तियां शामिल हुईं।
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कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वरिष्ठ IAS-IPS अधिकारी, जनप्रतिनिधि, न्यायाधीश, वरिष्ठ पत्रकार और समाज के प्रबुद्ध लोग पहुंचे। सभी ने दिवंगत राम यश सिंह के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और शोक संतप्त परिवार को सांत्वना दी। कार्यक्रम के दौरान कई भावुक पल भी देखने को मिले।
राम यश सिंह बिहार कैडर के 1985 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रहे थे। पुलिस सेवा के दौरान उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं। पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण और जहानाबाद जैसे संवेदनशील जिलों में बतौर एसएसपी उनकी कार्यशैली की अलग पहचान रही। ईमानदारी, अनुशासन और कड़े प्रशासनिक फैसलों के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा।
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बताया जाता है कि 27 अप्रैल को हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गया था, जिसके बाद 28 अप्रैल को लखनऊ के बैकुंठ धाम में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। रविवार को आयोजित त्रयोदश संस्कार में उनके पुत्र अमिताभ यश, रजनीश सिंह, राजीव सिंह, बृज राज सिंह, पौत्र यशवर्धन सिंह, पुत्रवधु रेनू सिंह सहित पूरा परिवार मौजूद रहा। राम यश सिंह का निधन पुलिस महकमे और समाज के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है। उनकी कार्यशैली और सिद्धांत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे।
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गौराकला में डेढ़ साल से बनी पानी की टंकी शोपीस बनी, पाइपलाइन अधूरी होने से ग्रामीण परेशान
वाराणसी: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना के तहत चिरईगांव विकास खंड के गौराकला ग्राम सभा में करीब डेढ़ साल पहले पानी की टंकी का निर्माण कराया गया था, लेकिन अब तक गांव में पाइपलाइन बिछाने का कार्य पूरा नहीं हो सका है। इसके चलते ग्रामीणों को आज तक शुद्ध पेयजल योजना का लाभ नहीं मिल पाया है।
ग्रामीणों के अनुसार, पानी की टंकी तैयार होने और बोर्रिंग होने के बावजूद घर-घर जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। पाइपलाइन का कार्य अधूरा होने के कारण ग्रामीण आज भी हैंडपंप और अन्य स्रोतों के सहारे पानी की जरूरत पूरी कर रहे हैं।
ग्राम प्रधान राजेश कुमार ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) को प्रार्थना पत्र देकर पाइपलाइन कार्य पूरा कराने की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि जल जीवन मिशन का उद्देश्य हर घर तक नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाना है, लेकिन गौराकला ग्राम सभा में योजना अधूरी पड़ी होने से इसका लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द पाइपलाइन कार्य पूरा कर जलापूर्ति शुरू कराने की मांग की है, ताकि गांव के लोगों को राहत मिल सके।
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Sunday, May 10, 2026
दुबई में प्रयागराज के बेटे की संदिग्ध मौत, अभी तक नहीं पहुंचा शव, मां बोली आखिरी बार चेहरा दिखा दो PM-CM लगाई गुहार
प्रयागराज: फूलपुर इलाके के युवक रंगबहादुर पटेल की दुबई में संदिग्ध हालात में मौत होने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। 11 दिन बीत जाने के बावजूद शव भारत नहीं पहुंच पाया है। पत्नी, मां और तीन मासूम बेटियां अंतिम दर्शन के इंतजार में हैं। परिजनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मदद की गुहार लगाई है। ताकि बेटे का शव जल्द वतन लौट सके।
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प्रयागराज जिले के फूलपुर थाना क्षेत्र स्थित फतेहपुर माफी गांव में इन दिनों मातम पसरा हुआ है। गांव के 26 वर्षीय रंगबहादुर पटेल की दुबई में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। लेकिन घटना के 11 दिन बाद भी उसका शव भारत नहीं पहुंच सका है। परिवार बेटे के अंतिम दर्शन के लिए तड़प रहा है। प्रशासन से लगातार मदद की मांग कर रहा है।
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रंगबहादुर इसी साल 26 जनवरी को रोज़गार की तलाश में दुबई गया था। वहां वह वर्ल्ड स्टार कंस्ट्रक्शन कंपनी में पेंटिंग का काम करता था। परिवार को उम्मीद थी कि विदेश में नौकरी मिलने से आर्थिक हालात सुधर जाएंगे। बच्चों का भविष्य बेहतर होगा। लेकिन अचानक आई मौत की खबर ने सबकुछ बदल दिया।
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पत्नी अनिता पटेल ने बताया कि 26 अप्रैल की रात उनकी पति से फोन पर सामान्य बातचीत हुई थी। कुछ घंटों बाद मोबाइल पर एक तस्वीर भेजी गई। जिसमें रंगबहादुर बेहोशी की हालत में नजर आ रहा था। साथ काम करने वाले लोगों ने बताया कि अचानक तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल ले जाया गया था। अगले दिन उसकी मौत की सूचना मिल गई। रंगबहादुर अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। उसके परिवार में बुजुर्ग मां प्रेम देवी, पत्नी अनिता, तीन छोटी बेटियां और एक विकलांग बहन हैं। पिता की पहले ही मौत हो चुकी है। घर की पूरी जिम्मेदारी उसी के कंधों पर थी।
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मां प्रेम देवी बेटे को याद कर बार-बार बेसुध हो जा रही हैं। उनका कहना है कि बेटे से आखिरी बार बात करने के बाद कभी नहीं सोचा था कि अब उसका शव देखने का इंतजार करना पड़ेगा। उन्होंने सरकार से हाथ जोड़कर बेटे का शव भारत लाने की अपील की है। परिजनों के मुताबिक, दुबई में पोस्टमार्टम हो चुका है। कंपनी की तरफ से जरूरी कागजी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इसके बावजूद शव अब तक भारत नहीं भेजा जा सका है। गांव में भी शोक का माहौल है। लोग परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं।
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सपा की बैठक में फूटा गुबार, टिकट की मांग सुनते ही भड़के नसीमुद्दीन, खाना छोड़ कार्यक्रम से निकले बाहर
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में समाजवादी पार्टी की अंदरूनी खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई। रामगंगा विहार स्थित एक बैंक्वेट हॉल में आयोजित पार्टी कार्यक्रम उस समय विवाद और नाराजगी का केंद्र बन गया, जब पूर्व कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ सपा नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी समर्थकों की टिकट मांग से नाराज होकर बीच कार्यक्रम से उठकर बाहर निकल गए। इस घटनाक्रम ने न सिर्फ स्थानीय नेताओं को असहज कर दिया बल्कि पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी और असंतोष की चर्चाओं को भी तेज कर दिया।
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दरअसल, रतनपुर कलां में प्रस्तावित पीडीए महापंचायत को लेकर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने पार्टी में किसी भी तरह के मनमुटाव से इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि समाजवादी पार्टी में मतभेद हो सकते हैं लेकिन मनभेद नहीं हैं। सभी नेता और कार्यकर्ता एकजुट होकर 2027 विधानसभा चुनाव में पार्टी को भारी जीत दिलाने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने पीडीए को सपा की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज को जोड़कर पार्टी प्रदेश में बड़ा राजनीतिक बदलाव लाने की तैयारी कर रही है।
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प्रेस वार्ता समाप्त होने के बाद बैंक्वेट हॉल में भोजन कार्यक्रम चल रहा था। इसी दौरान सलीम अख्तर के समर्थकों ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी के सामने मुरादाबाद विधानसभा सीट से सलीम अख्तर को 2027 चुनाव में टिकट दिलाने की मांग रख दी। बताया जा रहा है कि समर्थकों ने लगातार टिकट की पैरवी करने की अपील की, जिससे माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। वहां मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं को अंदाजा नहीं था कि यह मांग इतना बड़ा विवाद खड़ा कर देगी।
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समर्थकों की बात सुनते ही नसीमुद्दीन सिद्दीकी का गुस्सा खुलकर सामने आ गया। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि “मैं टिकट दिलाने वाला कौन होता हूं, मुझे पार्टी में आए अभी कितना समय हुआ है।” इतना कहते ही उन्होंने खाना बीच में छोड़ दिया और तेजी से बाहर निकल गए। मौके पर मौजूद विधायक नवाब जान, सलीम अख्तर और अन्य पदाधिकारियों ने उन्हें रोकने और मनाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने किसी की बात नहीं सुनी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक सिद्दीकी काफी नाराज दिखाई दे रहे थे और हाथ झटकते हुए कार्यक्रम स्थल से बाहर निकल गए।
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इस पूरे कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के कई बड़े नेताओं और जनप्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी रही। कार्यक्रम में केवल विधायक नवाब जान और कुछ पदाधिकारी ही मौजूद दिखाई दिए, जबकि सांसद और अन्य विधायक कार्यक्रम से दूरी बनाए रहे। इस पर सफाई देते हुए नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि संभल के सांसद जियाउर्रहमान बर्क के पिता और देहात विधायक हाजी नासिर कुरैशी की पत्नी की तबीयत खराब होने की वजह से वे लोग कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। हालांकि राजनीतिक गलियारों में इसे पार्टी के भीतर चल रही असहमति से जोड़कर देखा जा रहा है।
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मुरादाबाद में हुए इस घटनाक्रम के बाद समाजवादी पार्टी की अंदरूनी राजनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले टिकट को लेकर नेताओं और समर्थकों के बीच खींचतान बढ़ती जा रही है। जिस तरह सार्वजनिक कार्यक्रम में नाराजगी सामने आई, उससे विपक्ष को भी सपा पर हमला बोलने का मौका मिल सकता है। पार्टी भले ही एकजुटता का दावा कर रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर नेताओं के बीच खींचतान लगातार सामने आ रही है।
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प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने भाजपा सरकार पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महंगाई, बेरोजगारी और अपराध चरम पर पहुंच चुके हैं। गैस सिलेंडर से लेकर रसोई तक हर चीज महंगी हो चुकी है और आम जनता परेशान है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वालों पर बुलडोजर कार्रवाई की जाती है। तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि “मेरे घर बुलडोजर नहीं चला सकते क्योंकि चारों तरफ आर्मी के आवास हैं।”
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नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने दावा किया कि 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर महिलाओं को 40 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। साथ ही घरेलू उपभोक्ताओं को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने का भी वादा किया गया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी प्रदेशभर में पीडीए को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है और हर समाज को संगठन से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
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पूर्व मंत्री ने पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव को लेकर भी भाजपा और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भाजपा शासित राज्यों से अधिकारियों को भेजकर चुनाव प्रभावित करने की कोशिश की गई। साथ ही चुनाव आयोग को भाजपा की कठपुतली बताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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कार्यक्रम के दौरान जब पत्रकारों ने आजम खां और असदुद्दीन ओवैसी को लेकर सवाल पूछे तो नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अलग अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि आजम खां समाजवादी पार्टी के बड़े नेता हैं और उनकी बराबरी कोई नहीं कर सकता। वहीं ओवैसी को लेकर उन्होंने कहा कि “यह कौन हैं, हमें नहीं पता।” उनके इस बयान ने भी राजनीतिक हलकों मेंL नई चर्चाओं को जन्म दे दिया।
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