Latest News

Varanasi News
Purvanchal News

Gallery

Breaking News

Election

News

Recent Posts

Sunday, January 18, 2026

दीनापुर और संदहा में 3.99 करोड़ के कार्यों का शिलान्यास

वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विकासपरक विजन को गति देते हुए रविवार को महापौर अशोक कुमार तिवारी ने शहर के दो वार्डों में विकास कार्यों का भव्य शिलान्यास किया गया। वार्ड संख्या आठ दीनापुर और वार्ड संख्या 17 संदहा में कुल 3.99 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न नागरिक सुविधाओं और बुनियादी ढांचे का कायाकल्प किया जाएगा।


यह भी पढ़ें: लक्सा पुलिस ने ऑनलाइन जुआ खेलते तीन जुआड़ियों को किया गिरफ्तार, मोबाइल व नकदी बरामद

शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान महापौर ने वार्ड नंबर आठ दीनापुर में 1. 41 करोड़ रुपये तथा वार्ड नंबर 17 संदहा में 2 .58 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की आधारशिला रखी गई है। इन कार्यों के पूरा होने से स्थानीय निवासियों को जल निकासी, बेहतर सड़कों और अन्य मूलभूत सुविधाओं का लाभ मिलेगा।। महापौर ने कहा कि डबल इंजन की सरकार बिना किसी भेदभाव के हर गली और मोहल्ले तक विकास पहुँचाने के लिए संकल्पित है। 

यह भी पढ़ें: वाराणसी में चीनी मांझे ने 10 राहगीरों को किया लहूलुहान, मफलर-जैकेट ने बचाई जान

इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष और स्थानीय पार्षदों सहित भारतीय जनता पार्टी के बड़ी संख्या में सक्रिय कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यकर्ताओं ने इसे क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया। कार्यक्रम के दौरान स्थानीय नागरिकों ने भी पुष्प वर्षा कर जन प्रतिनिधियों का स्वागत किया। इस दौरान प्रमुख रूप से मंडल के पदाधिकारी, बूथ अध्यक्ष व क्षेत्रीय गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

यह भी पढ़ें: बंदरों और कुत्तों का आतंक, बनारस में हर साल 80 लाख खर्च फिर भी 2500 लोगों को बनाया शिकार

Friday, January 16, 2026

लक्सा पुलिस ने ऑनलाइन जुआ खेलते तीन जुआड़ियों को किया गिरफ्तार, मोबाइल व नकदी बरामद

वाराणसी; ऑनलाइन जुआ और सट्टेबाजी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत लक्सा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन जुआड़ियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक एंड्रॉयड मोबाइल फोन और 3480 रुपये नगद बरामद किए हैं।

.


यह भी पढ़ें: वाराणसी में चीनी मांझे ने 10 राहगीरों को किया लहूलुहान, मफलर-जैकेट ने बचाई जान

यह कार्रवाई पुलिस उपायुक्त काशी जोन गौरव बंशवाल एवं पुलिस उपायुक्त अपराध सरवणन टी.के. के निर्देशन तथा सहायक पुलिस आयुक्त दशाश्वमेध डॉ. अतुल अंजन त्रिपाठी के नेतृत्व में गठित टीम द्वारा की गई। प्रभारी निरीक्षक लक्सा राजू कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने गुरुवार को मुखबिर की सूचना पर सूरजकुंड पोखरा के पास दबिश दी।

यह भी पढ़ें: बंदरों और कुत्तों का आतंक, बनारस में हर साल 80 लाख खर्च फिर भी 2500 लोगों को बनाया शिकार

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी भाग्यलक्ष्मी ऐप के माध्यम से ऑनलाइन जुआ खेल रहे थे। मौके से पकड़े गए जुआड़ियों की पहचान रूमान फैसल पुत्र अनवर अली, निवासी लल्लापुरा, थाना सिगरा, नवनीत चौरसिया पुत्र गोपाल प्रसाद चौरसिया, निवासी जद्दूमंडी, थाना लक्सा और दीपू यादव पुत्र पन्नालाल यादव, निवासी सूरजकुंड, थाना लक्सा, वाराणसी के रूप में हुई है।

यह भी पढ़ें: अब यूपी में दोपहिया खरीदने पर लेना होगा दो हेलमेट

पुलिस ने तीनों आरोपियों के विरुद्ध सार्वजनिक जुआ अधिनियम की धारा 13 के तहत मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेज दिया है। गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम में प्रभारी निरीक्षक लक्सा राजू कुमार, उपनिरीक्षक प्रमोद कुशवाहा (चौकी प्रभारी औरंगाबाद), कांस्टेबल रंजन कुमार कुशवाहा, रामपाल सहित अन्य पुलिसकर्मी शामिल रहे। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ऑनलाइन जुआ और सट्टेबाजी के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और ऐसे अपराधों में संलिप्त लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह भी पढ़ें: संभल में अवैध निर्माणों पर चला बुलडोजर, प्रधान का घर भी ध्वस्त

वाराणसी में चीनी मांझे ने 10 राहगीरों को किया लहूलुहान, मफलर-जैकेट ने बचाई जान

वाराणसी: आसमान में उड़ती पतंग की डोर में लगे चीन के मांझे ने बुधवार को 10 लोगों को गंभीर रूप से घायल कर दिया। चीन के जानलेवा मांझे से किसी की गर्दन, किसी की नाक और किसी का हाथ या बांह कट गया। जैकेट और गले में लपेटे मफलर ने अधिकतर लोगों की जान बचा ली। बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में सुबह से देर शाम तक छह घायलों को भर्ती कराया गया। इसके अलावा मंडलीय, जिला और राजकीय अस्पतालों तथा निजी अस्पतालों में भी चीनी मांझे से घायल लोगों का उपचार किया गया। फ्लाईओवर और दोपहिया वाहन सवार लोग सबसे अधिक प्रभावित हुए।

यह भी पढ़ें: बंदरों और कुत्तों का आतंक, बनारस में हर साल 80 लाख खर्च फिर भी 2500 लोगों को बनाया शिकार

मंडुवाडीह थाना क्षेत्र के बरेका रोड, ककरमत्ता में बाइक सवार ऋषभ वर्मा (27) का गला चीन के मांझे से कट गया। उन्हें तुरंत नजदीकी निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां गले में सात टांके लगाए गए। दुर्गाकुंड में उपकेंद्र नगर पार्क के सामने स्कूटी सवार कृति गिरी के बायें गाल पर मांझे से कट लगा। हेलमेट पहनने की वजह से उसका गला और नाक बच गया। 

यह भी पढ़ें: अब यूपी में दोपहिया खरीदने पर लेना होगा दो हेलमेट

सामनेघाट पुल पर बाइक सवार जितेंद्र मौर्य की दोनों पलकों और नाक पर गहरा कट आया। चुरामनपुर निवासी जितेंद्र को रामनगर राजकीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों के अनुसार स्थिति फिलहाल स्थिर है।वहीं, रामनगर-पड़ाव क्षेत्र में सैफ (22), अमृता (26) और अमन गुप्ता (28) को भी रामनगर राजकीय अस्पताल में उपचार दिया गया। लालपुर-पांडेयपुर थाना क्षेत्र में बाइक सवार राजेंद्र (52) का गर्दन पर गहरा कट लग गया। उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। बरेका परिसर में टेलीफोन एक्सचेंज में कार्यरत टेक्नीशियन संतोष त्रिपाठी का गर्दन और ढूढ़ी कट गई। उन्हें तुरंत बरेका केंद्रीय अस्पताल में उपचार कराया गया।

यह भी पढ़ें: संभल में अवैध निर्माणों पर चला बुलडोजर, प्रधान का घर भी ध्वस्त

डीसीपी गोमती की अपील... गले में लपेटें मफलर

डीसीपी गोमती जोन आकाश पटेल ने शहरवासियों से अपील की है कि कुछ दिनों तक दोपहिया वाहन से यात्रा करते समय अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए अनिवार्य रूप से मानक हेलमेट का प्रयोग करें। साथ ही चीन के मांझे से होने वाली आकस्मिक दुर्घटनाओं से बचाव के लिए गले की सुरक्षा के लिए मफलर, स्कार्फ अथवा अन्य सुरक्षात्मक वस्त्र अवश्य पहनें।

यह भी पढ़ें: जम्मू कश्मीर में 82 हजार से अधिक पेड़ काटे गए और 45 करोड़ रुपये का मुआवजा बकाया, NGT सख्त

बंदरों और कुत्तों का आतंक, बनारस में हर साल 80 लाख खर्च फिर भी 2500 लोगों को बनाया शिकार

वाराणसी: नगर निगम की ओर से हर साल 80 लाख रुपये कुत्ता और बंदरों पर खर्च किए जा रहे हैं। बावजूद इसके ये कंट्रोल में नहीं हैं। रिकॉर्ड के अनुसार अब तक 2000 बंदरों को पकड़ कर नौगढ़ के जंगलों में छोड़ा गया है। 4000 कुत्तों का बंध्याकरण किया गया है। इसके बाद भी कुत्ते और बंदर से लोगों को राहत नहीं मिल रही है।

यह भी पढ़ें: अब यूपी में दोपहिया खरीदने पर लेना होगा दो हेलमेट

अदालत की टिप्पणी के बाद पिसौर में नए श्वान शेल्टर होम का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। यहां कुत्तों को रखा जाएगा। शहर में आवारा कुत्तों पर लगाम नहीं लग पा रहा है। ये आवारा कुत्ते आए दिन लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं। मंडलीय अस्पताल से मिले आंकड़ों के अनुसार रैबीज इंजेक्शन के 60-80 केस प्रतिदिन आ रहे हैं। इस वित्तिय वर्ष में आवारा कुत्तों ने 2500 लोगों को अपना शिकार बनाया। उधर, शहर में बंदरों संख्या 30 हजार से ज्यादा जबकि कुत्तों की संख्या 60 हजार है। इनका आतंक मंदिरों और पक्के महाल के क्षेत्रों में काफी ज्यादा है। मंडुवाडीह, सुंदरपुर, महमूरगंज, औरंगाबाद, सिद्धगिरीबाग, सिगरा, विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध, चौक, लंका आदि क्षेत्रों में बंदरों का उत्पात देखा जा सकता है। 

यह भी पढ़ें: संभल में अवैध निर्माणों पर चला बुलडोजर, प्रधान का घर भी ध्वस्त

नगर निगम के अनुसार कुत्तों के लिए ऐढ़े में एबीसी सेंटर बनाया गया है। जहां शहर के खूंखार कुत्तों को एकल बैरक में रखा जाता है। सेंटर में 40 एकल और 10 सामूहिक बैरक टाइप बनाए गए हैं। एकल में एक और सामूहिक में 10 कुत्ते साथ रहते हैं। एकल बैरक में खूंखार और रैबीज वाले कुत्ते को रखकर इलाज किया जाता है जबकि सामूहिक में सामान्य कुत्तों का इलाज होता है। कुत्तों का बंध्याकरण और बंदरों को पकड़कर नौगढ़ के जंगलों में छोड़ा जाता है। वहां से इन बंदरों का वापस लौटना मुश्किल है। हाल ही में पिसौर में श्वान शेल्टर होम का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। जहां सड़क पर घूमने वाले कुत्तों को भेजा जाएगा। - डॉ. संतोष पाल, चिकित्सा अधिकारी

यह भी पढ़ें: जम्मू कश्मीर में 82 हजार से अधिक पेड़ काटे गए और 45 करोड़ रुपये का मुआवजा बकाया, NGT सख्त

कुत्ते और बंदर से जुड़ी सूचना 1533 पर 

बंदर और कुत्ते से जुड़े किसी भी प्रकार की सूचना नगर निगम के कंट्रोल रूम में 1533 पर दी जा सकती है। कुत्तों के लिए हर जिले में एसपीसीए है। इसका फुल फॉर्म सोसाइटी फॉर द प्रिवेंशन ऑफ क्रूएलिटी टू एनिमल है। हिंदी में इसे पशु क्रूरता निवारण सोसाइटी कहते हैं। इसकी स्थापना 1824 में इंग्लैंड में हुई थी। ये पशु कल्याण के लिए अभियान चलाते हैं।

यह भी पढ़ें: वाराणसी में चाइनीज मांझे का जानलेवा आतंक; दुर्गाकुंड में हेलमेट के बावजूद युवती का चेहरा कटा, लोहता में युवक गंभीर रूप से घायल

Thursday, January 15, 2026

संभल में अवैध निर्माणों पर चला बुलडोजर, प्रधान का घर भी ध्वस्त

संभल: जिले में बुधवार को बुलडोजर गरजा. संभल तहसील क्षेत्र के बिछोली गांव में सुबह ही जिला प्रशासन ने सरकारी जमीन पर वर्षों से चले आ रहे अवैध कब्जों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी. आरआरएफ, भारी पुलिस फोर्स और जिला प्रशासन के अधिकारियों की मौजूदगी में स्कूल, पंचायत घर, उद्यान और खेल के मैदान के नाम दर्ज करीब 20 बीघा बेशकीमती सरकारी भूमि को कब्जा मुक्त कराया. तहसीलदार संभल धीरेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में दो बुलडोजर ने अवैध निर्माण को ध्वस्त किया.


यह भी पढ़ें: जम्मू कश्मीर में 82 हजार से अधिक पेड़ काटे गए और 45 करोड़ रुपये का मुआवजा बकाया, NGT सख्त

बिछोली गांव में बुधवार की सुबह जैसे ही बुलडोजर चलने की तैयारी शुरू हुई तो कुछ कब्जेदारों ने विरोध जताया और प्रशासन से नोंकझोंक भी हुई. माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण जरूर हुआ, लेकिन आरआरएफ और भारी पुलिस बल की मुस्तैदी के चलते हालात बेकाबू नहीं होने दिए गए. तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि अवैध कब्जों की सूची में ग्राम प्रधान अतीक का नाम भी शामिल था. प्रशासन ने किसी दबाव में आए बिना सबसे पहले प्रधान द्वारा बनाए गए अवैध मकान को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया. यह दृश्य गांव में चर्चा का बड़ा विषय बन गया.

यह भी पढ़ें: वाराणसी में चाइनीज मांझे का जानलेवा आतंक; दुर्गाकुंड में हेलमेट के बावजूद युवती का चेहरा कटा, लोहता में युवक गंभीर रूप से घायल

मौके पर मौजूद तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि जिस जमीन पर कार्रवाई की जा रही है, वह पंचायत घर, प्राथमिक विद्यालय, उद्यान और खेल मैदान के लिए राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है. इस भूमि पर किए गए कब्जों के खिलाफ विभिन्न न्यायालयों में मुकदमे पहले ही निस्तारित हो चुके हैं और बेदखली के स्पष्ट आदेश पारित हैं. इसके बावजूद कब्जेदार हठधर्मिता दिखाते हुए जमीन खाली नहीं कर रहे थे, जिस कारण प्रशासन को यह सख्त कदम उठाना पड़ा.

यह भी पढ़ें: लुठाकला में अवैध खनन पर छापा, प्रदीप यादव गिरोह का ट्रैक्टर-ट्राली सीज

तहसीलदार ने बताया कि पैमाइश की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी और सभी चिह्नित अवैध कब्जे हटाए जा रहे हैं. इनमें कुछ आवासीय और कुछ धार्मिक प्रकृति के कब्जे भी शामिल हैं. उन्होंने बताया कि ग्राम प्रधान के घर सहित 5 मकानों को ध्वस्त किया गया है. कार्रवाई के दौरान लेखपाल, कानूनगो, राजस्व निरीक्षक सहित 25 सदस्यीय राजस्व टीम मौके पर तैनात. प्रशासन की इस कार्रवाई से गांव में स्पष्ट संदेश गया है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

यह भी पढ़ें: विकास प्राधिकरण के सचिव ने भूमि अधिग्रहण के संबंध में नेवादा के किसानों के साथ बैठक कर दी धमकि

जम्मू कश्मीर में 82 हजार से अधिक पेड़ काटे गए और 45 करोड़ रुपये का मुआवजा बकाया, NGT सख्त

श्रीनगर: जम्मू और कश्मीर प्रशासन नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सामने यह मानने के बाद कड़ी न्यायिक जांच के दायरे में आ गया है कि इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए जरूरी अनिवार्य पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति जमा किए बिना 82,000 से ज़्यादा जंगल के पेड़ काट दिए गए, जिससे 45 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया रह गया.


यह भी पढ़ें: वाराणसी में चाइनीज मांझे का जानलेवा आतंक; दुर्गाकुंड में हेलमेट के बावजूद युवती का चेहरा कटा, लोहता में युवक गंभीर रूप से घायल

यह खुलासा रसिख रसूल भट बनाम केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर मामले की कार्यवाही के दौरान किया गया, जिसकी सुनवाई ट्रिब्यूनल ने 13 जनवरी, 2026 को की थी. जम्मू और कश्मीर के मुख्य सचिव की दी गई अनुपालन रिपोर्ट में, केंद्र शासित प्रदेश ने माना कि जंगल वाले इलाकों में किए गए लगभग 150 प्रोजेक्ट्स में 82,327 पेड़ काटे गए. रिपोर्ट में कहा गया है कि इन प्रोजेक्ट्स से होने वाली कुल प्रतिपूरक वनीकरण दायित्व 80.73 करोड़ रुपये है, जिसमें से 45.33 करोड़ रुपये अभी तक भुगतान नहीं किए गए हैं.

पर्यावरण कानून के तहत, जंगल की जमीन के दूसरे इस्तेमाल से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजे के तौर पर पेड़ लगाने का भुगतान जरूरी है. इस बात को मानने से प्रशासन के वन एक्ट, 1980 के पालन पर सवाल उठे हैं, जिसमें यह जरूरी है कि जंगल की जमीन को गैर-वन कामों के लिए इस्तेमाल करने से पहले उपयोगकर्ता एजेंसियां मुआवज़े के तौर पर ली जाने वाली लेवी जमा करें.

यह भी पढ़ें: लुठाकला में अवैध खनन पर छापा, प्रदीप यादव गिरोह का ट्रैक्टर-ट्राली सीज

केंद्र शासित प्रदेश के अनुसार, यह चूक 30 जुलाई, 2019 को पहले की राज्य प्रशासनिक काउंसिल द्वारा लिए गए पॉलिसी फैसले की वजह से हुई है. उस फैसले ने 2014 के कैबिनेट ऑर्डर को बदल दिया और सरकार को जंगल की जमीन के डायवर्जन के लिए मंज़ूरी देने की इजाजत दे दी, भले ही मुआवजे का भुगतान पेंडिंग हो. अधिकारियों ने कहा कि इस कदम का मकसद सार्वजनिक अवसंरचना के कामों को तेजी से पूरा करना था.

हालांकि, याचिकाकर्ता, पर्यावरणविद् और अधिवक्ता रसिख रसूल भट ने पॉलिसी में इस बदलाव का कड़ा विरोध किया है. 8 जनवरी, 2026 को ट्रिब्यूनल के सामने दायर की गई आपत्तियों में, भट ने तर्क दिया कि यह फैसला मनमाना था और कानूनी पर्यावरण सुरक्षा उपायों को कमजोर करता है.

यह भी पढ़ें: विकास प्राधिकरण के सचिव ने भूमि अधिग्रहण के संबंध में नेवादा के किसानों के साथ बैठक कर दी धमकि

उन्होंने कहा कि इस छूट से पर्यावरण के नुकसान को रोकने के बजाय, बाद में जंगल कानून के उल्लंघन को सही ठहराया गया. भट्ट ने कहा कि मुआवजा देने का तरीका फॉरेस्ट क्लीयरेंस की एक मुख्य जरूरत है और इसे मंज़ूरी के बाद की औपचारिकता नहीं माना जा सकता.

ट्रिब्यूनल की नजर में आने वाले खास प्रोजेक्ट्स में से एक उत्तर कश्मीर में हंदवाड़ा-बंगस रोड है, जो पर्यावरण के रूप से संवेदनशील राजवार फॉरेस्ट रेंज से होकर गुजरता है. इस सड़क का काम लोक निर्माण विभाग कर रहा है. याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि प्रोजेक्ट पर कंस्ट्रक्शन 2017 में शुरू हुआ था, जो सितंबर 2019 में अंतिम वन मंजूरी मिलने से लगभग दो साल पहले था.

हालांकि प्रशासन ने ट्रिब्यूनल के सामने माना कि 488 पेड़ सही मंज़ूरी लेकर काटे गए थे, लेकिन उसने यह भी माना कि 2021 में गैर-कानूनी तरीके से पेड़ काटे गए थे, जिसके लिए बाद में नुकसान की भरपाई की गई. भट ने आगे कहा कि ऐसे प्रोजेक्ट्स ने राजवार इलाके में इंसान-जानवरों के बीच टकराव को बढ़ा दिया है.

यह भी पढ़ें: अभी नहीं निकली ठंड की हवा, इस साल 6-6 घंटे में 11 डिग्री तक बदला पारा; धूप से पारा 24 डिग्री

उन्होंने बताया कि जंगल के प्रस्तावों में खुद इलाके में जंगली जानवरों की मौजूदगी दर्ज थी, फिर भी कहा जाता है कि प्रोजेक्ट्स बिना बड़े वाइल्डलाइफ मैनेजमेंट या नुकसान कम करने की योजना के आगे बढ़े. सुनवाई के दौरान केंद्र शासित प्रदेश की ओर से पेश वकील ने मुख्य सचिव की अनुपालन रिपोर्ट के खिलाफ उठाई गई आपत्तियों का जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा.

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की प्रधान पीठ, जिसके चेयरमैन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव हैं, ने सभी पार्टियों को अपनी दलीलें पूरी करने और जरूरी रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया. ट्रिब्यूनल ने मामले की आखिरी सुनवाई 9 अप्रैल, 2026 को तय की है।

यह भी पढ़ें: मुंहबोला भाई ने महिला से की ठगी :- वाराणसी में गिफ्ट के नाम पर छह लाख रुपये लिए, FIR दर्ज

Wednesday, January 14, 2026

वाराणसी में चाइनीज मांझे का जानलेवा आतंक; दुर्गाकुंड में हेलमेट के बावजूद युवती का चेहरा कटा, लोहता में युवक गंभीर रूप से घायल

वाराणसी: प्रतिबंधित चाइनीज मांझे का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिसकी चपेट में आने से बुधवार को दो अलग-अलग घटनाओं में एक युवती और एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। सबसे दर्दनाक घटना भेलूपुर थाना क्षेत्र के दुर्गाकुंड इलाके में हुई, जहाँ स्कूटी सवार एक युवती मांझे की चपेट में आ गई। इस घटना की सबसे डराने वाली बात यह रही कि युवती ने सुरक्षा के लिए हेलमेट पहन रखा था, इसके बावजूद मांझे की धार इतनी तेज थी कि उसका चेहरा बुरी तरह कट गया। युवती को लहूलुहान अवस्था में तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उसका उपचार जारी है। यह पूरी घटना पास में लगे एक सीसीटीवी कैमरे में भी कैद हो गई है।


यह भी पढ़ें: लुठाकला में अवैध खनन पर छापा, प्रदीप यादव गिरोह का ट्रैक्टर-ट्राली सीज

दुर्गाकुंड की इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन के दावों और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवती अपनी सामान्य गति से स्कूटी चला रही थी कि अचानक हवा में लटक रहा मांझा उसके गले और चेहरे पर फंस गया। हेलमेट का शीशा गिरा होने के बाद भी मांझा त्वचा तक पहुँच गया, जिससे गहरा घाव हो गया। मौके पर मौजूद लोगों ने आनन-फानन में उसे अस्पताल पहुँचाया। सीसीटीवी फुटेज में हादसे की भयावहता साफ देखी जा सकती है, जिसने स्थानीय लोगों में दहशत पैदा कर दी है। युवती का नाम कृति गिरी, पुत्री अनिल गिरी निवासी कंदवा बताया जा रहा है।

यह भी पढ़ें: विकास प्राधिकरण के सचिव ने भूमि अधिग्रहण के संबंध में नेवादा के किसानों के साथ बैठक कर दी धमकि

इसी तरह की एक अन्य घटना में लोहता के चुरामनपुर निवासी जितेंद्र मौर्य भी चाइनीज मांझे का शिकार बने। जितेंद्र अपनी मोटरसाइकिल से रामनगर की ओर जा रहे थे। अभी वह सामने घाट पुल पार करने ही वाले थे कि अचानक मांझा उनके चेहरे पर आकर लिपट गया। इस हादसे में मांझे की धार ने उनकी दोनों पलकों और नाक पर गहरा कट मार दिया, जिससे वह सड़क पर ही गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े।

यह भी पढ़ें: अभी नहीं निकली ठंड की हवा, इस साल 6-6 घंटे में 11 डिग्री तक बदला पारा; धूप से पारा 24 डिग्री

घटनास्थल पर मौजूद राहगीरों ने सक्रियता दिखाते हुए जितेंद्र को तत्काल रामनगर स्थित अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने बताया कि मांझा आँखों के बेहद करीब था, जिससे उनकी दृष्टि को भी खतरा हो सकता था, लेकिन समय रहते उपचार मिलने से फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर बनी हुई है। पुलिस की तमाम पाबंदियों और छापेमारी के बावजूद बाजार में चाइनीज मांझे की उपलब्धता और उसका बेखौफ इस्तेमाल राहगीरों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है।

यह भी पढ़ें: मुंहबोला भाई ने महिला से की ठगी :- वाराणसी में गिफ्ट के नाम पर छह लाख रुपये लिए, FIR दर्ज

Video