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Wednesday, May 06, 2026

बजट के अभाव में सिंचाई विभाग के कर्मचारियों का वेतन रोके जाने से रोष


वाराणसी:
बजट के अभाव में सिंचाई विभाग के  कर्मचारियों का वेतन शासन द्वारा समय से बजट आवंटन न किए जाने के कारण रुका हुआ है जिससे कर्मचारियों में रोष बढ़ता जा रहा है। 


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राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष शशिकान्त श्रीवास्तव ने बताया कि माह मार्च का वेतन बजट की प्रत्याशा में सभी जिलाधिकारियों को वेतन आहरण करने के निर्देश जारी किए गए थे परन्तु ई-आफिस के मैपिंग व प्रशिक्षण विभागाध्यक्ष द्वारा समय से न कराये जाने के निर्देश का अनुपालन कराये जाने से काफी विलम्ब से वेतन भुगतान हुए,वहीं माह अप्रैल के वेतन का भुगतान शासन द्वारा समय समय बजट आवंटन न किए जाने के कारण हो रहा है.

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इससे कर्मचारियों में रोष व्याप्त होने के कारण माननीय मुख्यमंत्री महोदय से शीघ्र ही शासन स्तर से बजट आवंटन किये जाने व सभी कर्मचारियों द्वारा ई-आफिस के माध्यम से सम्पूर्ण कार्य लिये जाने हेतु सभी कर्मचारियों को प्रशिक्षण के साथ साथ प्रत्येक जिलास्तरीय कार्यालयों के अतिरिक्त क्षेत्रिय कार्यालयों में ई-आफिस संचालन हेतु समस्त ब्यवस्थायें उपलब्ध कराना सुनिश्चित किए जाने की मांग किया और यह भी मांग की है कि ई-आफिस के लिए सुदृढ़ ब्यवस्था किये जाने बगैर वेतन रोके जाने से कर्मचारियों को आर्थिक व मानसिक कष्टों का सामना करना पड़ेगा जिसका प्रभाव फील्ड स्तरीय कर्मचारियों पर ज्यादा पड़ेगा।

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वाराणसी नगर निगम ने नाली जाम करने के आरोप में ठोका 50 हजार रुपये का जुर्माना

वाराणसी: शहर की सड़कों पर अतिक्रमण और गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ नगर निगम ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। इस क्रम में मंगलवार को वरुणापार क्षेत्र के निरीक्षण के दौरान रैना विला रोड पर गिट्टी और बालू गिराकर रास्ता बाधित करने और नाली जाम करने के आरोप में नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने दो व्यक्तियों पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।


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साथ ही तत्काल सड़क से निर्माण सामग्री न हटाने पर संबंधितों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की भी चेतावनी दी । उन्होंने कहा कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और आवागमन बाधित करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

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नगर आयुक्त सबसे पहले वरुणापार क्षेत्र के भक्ति नगर पहुंचे। यहां नालों की सफाई का कार्य उन्हें संतोषजनक मिला । वहीं सफाई के बाद निकाला गया कूड़ा और सिल्ट सड़क किनारे देख उन्होंने नाराजगी जताई। 

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उन्होंने सामान्य विभाग के अधिशासी अभियंता से नाला सफाई के 24 घंटे के भीतर हर हाल में सिल्ट का उठान सुनिश्चित कराने का सख्त निर्देश दिया ताकि क्षेत्रीय जनता को दुर्गंध और गंदगी से निजात मिल सके।

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Tuesday, May 05, 2026

वाराणसी में 4.67 करोड़ की फसल बीमा क्षतिपूर्ति वितरित

वाराणसी: जनपद में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को बड़ी राहत दी गई है। सोमवार को विकास भवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में खरीफ-2025 एवं रबी-2025-26 के अंतर्गत क्षतिपूर्ति राशि का वितरण किया गया।


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कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या उपस्थित रहीं। इस दौरान उन्होंने किसानों को प्रतीकात्मक चेक वितरित किए। लाभान्वित किसानों में गंगा प्रसाद सिंह, देवब्रत सिंह, योगेंद्र प्रताप सिंह, बाबा और विवेक कुमार सिंह शामिल रहे, जिन्हें क्रमशः 1.60 लाख, 1.49 लाख, 1.42 लाख, 87,899 और 70,806 रुपये की राशि दी गई।

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जिला पंचायत अध्यक्ष ने किसानों से अपील की कि वे खरीफ सीजन में अपनी अधिसूचित फसलों का शत-प्रतिशत बीमा कराएं, ताकि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से बचाव हो सके। साथ ही कृषि विभाग द्वारा धान, उड़द, मूंग, अरहर, तिल और ढैंचा के बीज अनुदान पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिनका लाभ उठाने की भी सलाह दी गई।

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कार्यक्रम का संचालन उप कृषि निदेशक अमित जायसवाल ने किया। इस मौके पर जिला कृषि अधिकारी संगम मौर्या, विभिन्न विकास खंडों के कृषि अधिकारी, एस.बीआई इंश्योरेंस के जिला प्रबंधक सुशील तिवारी समेत 50-60 किसान मौजूद रहे। बताया गया कि खरीफ-2025 में बीमित 14,448 किसानों में से 4,467 किसानों को कुल 4.67 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति वितरित की गई है।

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वरुणा रिवर फ्रंट के प्रस्ताव को शासन से मिली हरी झंडी, 48 नाले टैप होने के बाद नहीं गिरेगा मलजल

वाराणसी : नगर निगम ने शहर के 2.33 लाख भवन स्वामियों को बड़ी राहत देते हुए वर्तमान वित्तीय वर्ष में टैक्सा जमा करने भारी छूट देने का निर्णय लिया है। इस क्रम में 15 जुलाई तक गृहकर, जलकर व सीवर कर जमा करने वाले भवन स्वामियों को 10 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। वहीं, डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए ऑनलाइन टैक्स जमा करने पर निगम 12 प्रतिशत की विशेष छूट प्रदान किया जाएगा। 


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महापौर अशोक कुमार तिवारी की अध्यक्षता में सोमवार को निगम के सभागार में हुई कार्यकारिणी की बैठक में सामाजिक सरोकारों को ध्यान में रखते हुए दृष्टिहीन व 80 प्रतिशत से अधिक विकलांगता वाले भवन स्वामियों का टैक्स शत-प्रतिशत माफ करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। हालांकि, इस लाभ को प्राप्त करने के लिए संबंधित व्यक्ति को सक्षम अधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र निगम कार्यालय में प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। वहीं जिन भवन स्वामियों ने चालू वित्तीय वर्ष का टैक्स पहले ही जमा कर दिया है, उन्हें निराश होने की आवश्यकता नहीं है। उनकी छूट की राशि का समायोजन अगले वित्तीय वर्ष के बिल में कर दिया जाएगा। इसी प्रकार, लाइसेंस शुल्क पर भी व्यापारियों को 10 प्रतिशत की राहत दी गई है। यह सभी लाभ एक सप्ताह के भीतर मिलने शुरू हो जाएंगे। बैठक के दौरान नगर निगम अधिनियम की धारा 91 (2) के तहत पार्षद राजकपूर चौधरी द्वारा वरुणा कॉरिडोर की बदहाली का मुद्दा उठाया। इस पर नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि सिंचाई विभाग द्वारा बिछाई गई सीवर लाइन ध्वस्त होने के कारण निगम ने अब तक इसे हैंडओवर नहीं लिया है। निगम के प्रयास से वरुणा रिवर फ्रंट बनाने के प्रस्ताव को शासन से मंजूरी मिल गई है। छह प्रोजेक्ट के तहत वरुणा में गिरने वाले कुल 48 नालों को टैप किया जाएगा, जिसमें शहरी क्षेत्र के 17 खुले नाले भी शामिल हैं। इसके अलावा वरुणा के किनारे नई सीवर लाइन बिछाई जाएगी। करीब पांच से आठ फीट ऊंचा बनने वाले रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट के डेढ़ वर्ष के भीतर पूरा होने की संभावना है। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से वरुणा किनारे के सौंदर्यकरण के साथ-साथ नदी को प्रदूषण मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में अब वरुणा में सीधे मलजल नहीं गिरेगा। 

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शहर के विकास और बुनियादी ढांचे के लिए निगम रक्षा संपदा विभाग और रेलवे विभाग से लेगा जमीन

शहर के विकास और बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए नगर निगम रक्षा संपदा विभाग और रेलवे की कुछ जमीनों को लेने का निर्णय लिया है। इसके बदले में निगम अपनी उतनी ही मूल्य की जमीन रेलवे को देने का प्रस्ताव दिया है। इसमें रक्षा संपदा विभाग से कैंटोंमेंट स्थित गुडशेड बाजार में 1.2286 हेक्टेयर, फुलवरिया फ्लाईओवर के नीचे 3.8121 हेक्टेयर, डोमरी व सूजाबाद में 19.6690 हेक्टेयर, कैंटोंमेंट (160 एकड़ में से) 34.259 हेक्टेयर (अवशेष भूमि) शामिल है। इसी प्रकार रेलवे विभाग से घौसाबाद (आराजी सं. 42/53): 2830 वर्ग मीटर (उत्तर रेलवे), सनबीम लहरतारा से मण्डुआडीह मार्ग पर 2029.30 वर्ग मीटर, गोल्डन पीकॉक के पीछे (गुडशेड बाजार) में लगभग 4100 वर्ग भूमि शामिल है। निगम अपनी उतनी ही मूल्य की जमीन रेलवे को भी देगा। कार्यकारिणी ने इसकी भी मंजूरी दे दी। लहरतारा में निगम पोर्टेबल कांपेक्टर ट्रांसफर स्टेशन (पीसीटीएस) स्था।पित करेगा। 

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पंचक्रोशी परिक्रमा मार्ग की सुधरेगा सूरत, श्रद्धालुओं को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं

बैठक के दौरान सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा आगामी 15 मई, 2026 से शुरू हो रहे अधिमास और उससे जुड़ी काशी पंचक्रोशी यात्रा का रहा। कार्यकारिणी सदस्य प्रवीण राय ने सदन का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि पंचक्रोशी परिक्रमा मार्ग में पड़ने वाले पड़ावों पर अव्यवस्थाओं का अंबार है। उन्होंने पिछली यात्रा के अनुभवों का उल्लेख करते हुए बताया कि कई सड़कें कंकड़युक्त और गड्ढों वाली हैं, जिससे पैदल चलने वाले बुजुर्ग श्रद्धालुओं और महिलाओं के पैर चोटिल हो गए थे। इस पर कार्यकारिणी ने सख्त रुख अपनाते हुए नगर आयुक्त को आदेशित किया कि यात्रा शुरू होने से पूर्व सभी परिक्रमा पथों पर सड़कों की मरम्मत, स्वच्छ पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, शौचालय, पंखे और स्वास्थ्य शिविरों का उचित प्रबंध किया जाए। शहर के सौंदर्यीकरण और ऐतिहासिक विरासत के सम्मान को लेकर उपसभापति नरसिंह दास ने भी कई प्रस्ताव रखे। उन्होंने वाराणसी के समस्त पूर्व महापौरों और नगर प्रमुखों के आवास तक जाने वाले मार्गों व गलियों के पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण की आवश्यकता पर बल दिया। इसके साथ ही, उन्होंने शहर के विभिन्न पार्कों और महापुरुषों की प्रतिमाओं की स्थिति सुधारने का मुद्दा भी उठाया। पर्यटन की दृष्टि से विदेशी और स्थानीय नागरिकों की सुविधा के लिए नगर निगम ने सार्वजनिक शौचालयों के प्रबंधन में बड़े बदलाव का निर्णय लिया है। उपसभापति के सुझाव पर अब शहर के यूरिनल्स को पूर्णतः निःशुल्क किया जाएगा और वहां हिंदी व अंग्रेजी में रेट बोर्ड लगाए जाएंगे ताकि पारदर्शिता बनी रहे। महापौर ने एक सप्तािह के भीतर यूरिनल्स को पूर्णतः निःशुल्क करने व हिंदी व अंग्रेजी में रेट बोर्ड लिखवाने का निर्देश दिया। इसके बेहतर रखरखाव के लिए एक विशेष एजेंसी की नियुक्ति पर भी सहमति बनी है। 

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भारत सेवाश्रम से सुलभ तक बनेगा आधुनिक 'फल बाजार'

शहर की सड़कों पर अनियंत्रित और अव्यवस्थित तरीके से लगने वाले ठेले-गुमटियों को सुव्यवस्थित करने के करने में जुटा हुआ है। इसकी शुरुआत निगम मुख्यालय से ही की जाएगी। प्रथम चरण में सिगरा स्थित भारत सेवाश्रम के मोड़ से लेकर सुलभ शौचालय तक सड़क की पटरियों पर एक सुव्यवस्थित 'फल बाजार' विकसित करने करने का निर्णय लिया गया है। इसका उद्देश्य सड़क किनारे लगने वाली दुकानों को एक निश्चित स्वरूप देना है, जिससे मार्ग पर सुरक्षा बनी रहे और आम जनता को फल आदि खरीदने में सुविधा हो। जल निकासी को लेकर हनुमान प्रसाद ने शहर के कच्चे नालों को पक्का करने की योजना अगली बैठक में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। उन्होंने भीषण गर्मी को देखते हुए शहर के सभी चौराहों, कुंडों और तालाबों पर लगे बंद पड़े फौआरों को तत्काल संचालित करने की मांग भी की। कार्यकारिणी सदस्य मदन मोहन तिवारी ने पिछले वर्षों में वार्डों में हुए कार्यों की सूची में अनियमितता का मुद्दा उठाया। उन्होंने मांग की कि वर्ष 2023 से 2026 तक स्वीकृत सभी पूर्ण और अपूर्ण कार्यों की विस्तृत रिपोर्ट मय कारण एक सप्ताह के भीतर पार्षदों को उपलब्ध कराई जाए ताकि जमीनी स्तर पर उनका सत्यापन हो सके। वहीं, प्रमोद राय ने ठेकेदारों द्वारा 10 प्रतिशत से अधिक 'बिलो पर टेंडर डालकर कार्य करने और भुगतान के समय होने वाली 10-15 प्रतिशत की कटौती पर सवाल खड़े किए। उन्होंने संदेह व्यक्त किया कि ऐसी स्थिति में कार्य मानक के अनुसार नहीं हो पा रहे हैं, जिसकी जांच होनी अनिवार्य है। सड़कों के बार-बार टूटने की समस्या पर लगाम लगाने के लिए सुशील गुप्ता ने एक नई व्यवस्था का प्रस्ताव दिया। उन्होंने कहा कि अन्य कार्यदायी संस्थाओं द्वारा किए जाने वाले कार्यों के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र देते समय कड़ी शर्तें रखी जाएं, जिसमें कार्य की वारण्टी अवधि तय करना और समय से पहले क्षतिग्रस्त होने पर संबंधित एजेंसी से ही मरम्मत कराना अनिवार्य होगा। वार्ड नंबर-9 शिवपुर के इन्द्रपुर में कांशीराम आवास योजना की बदहाली पर अशोक मौर्या ने ध्यान आकर्षित किया और वहां सीवर व रास्तों के पुनर्निर्माण की मांग की। 

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बैठक में इनकी रही उपस्थिति

बैठक में उपसभापति नरसिंह दास, कार्यकारिणी सदस्य अमरदेव यादव, प्रमोद राय, , हनुमान प्रसाद , प्रवीण राय, सुशील गुप्ता योगी, मदन मोहन तिवारी, राजकुमार चौधरी, अशोक मौर्या, माधुरी सिंह, सुशीला देवी स‍हित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। इसके अलावा नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल, अपर नगर आयुक्त सविता यादव, अमित कुमार, संगम लाल, संयुक्त नगर आयुक्ती कृष्ण चंद्र, सहायक नगर आयुक्त अनिल कुमार यादव, जलकल के महाप्रबंधक अनूप सिंह, सीटीओ कुमार असीम रंजन, शिखा मौर्या, मुख्य नगर लेखा परीक्षक संजय प्रताप सिंह, सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।

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सावधान! बिना रजिस्ट्रेशन कुत्ता-बिल्ली पालना पड़ेगा भारी, नगर निगम वसूलेगा 5000 तक जुर्माना

वाराणसी: धर्म नगरी काशी में यदि आप कुत्ता या बिल्ली पालने के शौकीन हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। नगर निगम वाराणसी अब पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण नियम 2017 को सख्ती से लागू करने जा रहा है। अब शहर की सीमा के भीतर रहने वाले हर पशुपालक को अपने पालतू डॉग या कैट का पंजीकरण (Registration) कराना अनिवार्य होगा। नियमों की अनदेखी करने पर न केवल भारी जुर्माना लगेगा, बल्कि आपके पालतू जानवर को जब्त भी किया जा सकता है।


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पशुपालकों की सुविधा का ख्याल रखते हुए नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने पंजीकरण प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल कर दिया है। अब आपको नगर निगम के दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। आप अपने मोबाइल में 'स्मार्ट काशी ऐप' (Smart Kashi App) डाउनलोड कर घर बैठे ही अपने पालतू जानवर का विवरण दर्ज करा सकते हैं।

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नगर निगम के पशु कल्याण एवं चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष पाल ने स्पष्ट किया कि पंजीकरण न कराने की स्थिति में पशुपालकों पर 500 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य शहर में पालतू जानवरों का सटीक डेटा तैयार करना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। नगर निगम ने सुरक्षा कारणों से कुछ आक्रामक नस्लों के कुत्तों को पालने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं. पिटबुल (Pitbull), रॉटवीलर (Rottweiler), डोगो अर्जेंटीनो (Dogo Argentino), तोसा (Tosa), फाइला ब्रासीलियो (Fila Brasileiro) जैसे खूंखार नस्ल शामिल है.

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नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने कहा कि पंजीकरण प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाने के लिए इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया गया है। उन्होंने सभी पशुपालकों से अपील की है कि वे समय रहते अपने पालतू जानवरों का रजिस्ट्रेशन करा लें, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई या जुर्माने से बचा जा सके।

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Saturday, May 02, 2026

हत्यारोपी की टूटी शादी, गांव में लटका ताला; मनीष ने 70 परिवारों को दिया था रोजगार

वाराणसी: पिंडरा थाना क्षेत्र के भरथरा गांव में कारोबारी मनीष सिंह की पीट-पीटकर हत्या के मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। इस हत्याकांड में नामजद आरोपी मनीष राजभर की शादी टूट गई है। लड़की पक्ष ने साफ तौर पर कहा कि वे हत्यारोपी से अपनी बेटी का विवाह नहीं कर सकते। उल्लेखनीय है कि मनीष राजभर की शादी एक मई को तय थी।


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दूसरी ओर, पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश तेज कर दी है। घटना के बाद से ही आरोपी फरार हैं और उनकी लोकेशन ट्रेस करने का प्रयास किया जा रहा है। इस मामले में कुल आठ लोगों को नामजद किया गया है। थाना प्रभारी अतुल कुमार सिंह के अनुसार पांच प्रमुख आरोपियों आशीष राजभर, मनीष राजभर, दीपक राजभर, गोविंद राजभर और नागेंद्र राजभर की तलाश जारी है। इन सभी पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है।

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हत्या के बाद गांव का माहौल पूरी तरह बदल गया है। खासकर राजभर बस्ती में सन्नाटा पसरा हुआ है। पुलिस कार्रवाई के डर से अधिकांश लोग अपने घरों में ताला लगाकर फरार हो गए हैं। गांव में केवल कुछ बुजुर्ग महिलाएं ही बची हैं, जो पशुओं की देखभाल कर रही हैं। मृतक के चाचा अरुण सिंह ने बताया कि मनीष सिंह गांव के विकास में सक्रिय थे। उन्होंने करीब 70 परिवारों को दोना-पत्तल बनाने की मशीनें लगवाकर स्वरोजगार से जोड़ा था। उनके कारखाने में 17-18 लोग काम करते थे, जिनमें सात दिव्यांग भी शामिल हैं। उनकी हत्या से गांव में शोक और आक्रोश दोनों का माहौल है।

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इधर, मनीष सिंह के परिजनों से मिलने जा रहे समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल को बृहस्पतिवार को पुलिस ने रास्ते में रोक दिया। जिलाध्यक्ष सुजीत यादव ‘लक्कड़’ के नेतृत्व में जा रहे कार्यकर्ताओं ने विरोध स्वरूप धरना दिया। काफी देर बाद पुलिस ने कुछ सदस्यों को पैदल जाने की अनुमति दी। प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित परिवार से मिलकर सांत्वना दी और हर संभव मदद का आश्वासन दिया।

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काशी विश्वनाथ मंदिर में ऐप आधारित व्यवस्था का विरोध तेज, कांग्रेस ने उठाए सवाल

वाराणसी: श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रस्तावित ऐप आधारित दर्शन व्यवस्था को लेकर राजनीतिक विरोध तेज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया दौरे के बाद लागू की जा रही नई डिजिटल प्रणाली के खिलाफ कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने प्रशासन पर आस्था से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है। विरोध को देखते हुए शुक्रवार को मंदिर परिसर के बाहर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।


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कांग्रेस महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने मंदिर प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बाबा विश्वनाथ के दरबार को “व्यापारिक और कॉरपोरेट मॉडल” में बदलने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण और एसडीएम शंभूशरण को तत्काल हटाने की मांग की। राघवेंद्र चौबे ने कहा कि काशी की पहचान उसकी आध्यात्मिक परंपरा, सरल दर्शन व्यवस्था और लोक आस्था से रही है, लेकिन वर्तमान प्रशासन श्रद्धालुओं को मोबाइल ऐप और डिजिटल प्रक्रियाओं के दायरे में बांधने का प्रयास कर रहा है। उनका आरोप था कि मंदिर को “प्रयोगशाला” बनाकर सनातन परंपराओं के साथ प्रयोग किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सदियों से बाबा विश्वनाथ के दर्शन श्रद्धा और विश्वास के आधार पर होते आए हैं, लेकिन अब व्यवस्था को तकनीकी नियंत्रण और बाजारीकरण की ओर ले जाया जा रहा है। कांग्रेस के अनुसार, ऐप आधारित व्यवस्था से ग्रामीण श्रद्धालु, बुजुर्ग, महिलाएं, मजदूर और तकनीकी संसाधनों से दूर लोग सबसे अधिक प्रभावित होंगे। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मंदिर प्रशासन स्थानीय नागरिकों और आम श्रद्धालुओं की सुविधा की बजाय वीआईपी संस्कृति और नियंत्रण आधारित व्यवस्था को बढ़ावा दे रहा है। पार्टी ने काशीवासियों के लिए निर्धारित दर्शन द्वारों की समय सीमा बढ़ाने और सरल दर्शन व्यवस्था बहाल करने की मांग की।
पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि ऐप आधारित व्यवस्था वापस नहीं ली गई तो कांग्रेस, संत समाज और स्थानीय लोग व्यापक जनआंदोलन शुरू करेंगे। राघवेंद्र चौबे ने कहा कि “काशी की आत्मा को प्रशासनिक अहंकार और मोबाइल ऐप के जरिए नियंत्रित नहीं किया जा सकता।” वहीं समाजवादी पार्टी ने भी इस व्यवस्था का विरोध करते हुए इसे श्रद्धालुओं की आस्था पर अनावश्यक बंधन बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि धर्म और परंपरा को तकनीकी ढांचे में सीमित करने का प्रयास उचित नहीं है। फिलहाल मंदिर प्रशासन की ओर से इस विवाद पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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